महाभारत के ये रहस्य नही जानते होगे आप, जानिए विस्तार से - Bhartiyaweb

महाभारत के ये रहस्य नही जानते होगे आप, जानिए विस्तार से

महाभारत एक ऐसा ग्रंथ है जिससे हमारी आस्थाएँ जुड़ी हुई हैं। ये ऐसा महाग्रंथ है जिसके बारे मे जितना जाना जाए उतना ही कम है। हमारे देश के बहुत सारे लोगों ने महाभारत कभी नही पढ़ी है लेकिन उसे टीवी पर देखा है। लेकिन असल महाभारत के बारे मे जानने के लिए आपको वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत पढ़नी होगी, हमारा ये शोध असल महाभारत ग्रंथ पर आधारित है। आज हम आपको महाभारत के कुछ ऐसे रहस्य बताने वाले हैं जो आपने इससे पहले कभी नही सुने होंगे।

1.दोस्तों महाभारत को ध्यान पूर्वक पढ़ने पर आपको पता चलेगा की महाभारत मे 18 अंक का बड़ा रहस्य है। दोस्तों महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चला था, गीता मे 18 अध्याय हैं, श्री कृष्ण ने अर्जुन को 18 दिनों तक गीता का ज्ञान दिया, कौरवों और पांडवों की कुल सेना 18 अक्षुणी थी, युद्ध समाप्ति के बाद जो महायोद्धा बचे थे उनकी संख्या भी 18 ही है।

2. दोस्तों युधिष्ठिर के जन्म के बाद गांधारी ने भी पुत्र की कामना की और वेदव्यास जी से पुत्र का वरदान प्राप्त कर लिया। लेकिन गर्भ धारण करने के बाद किसी क्रोध की वजह से गांधारी ने अपने पेट पर मुक्का मार लिया और गर्भ को गिरा दिया। इस बात का पता वेदव्यास जी को चला तब उन्होने गांधारी से कहा मेरा वरदान कभी खाली नही जाता, उन्होने गांधारी को सौ कुंड बनाकर उनमे घी डलवाने को कहा। वेदव्यास जी ने गांधारी के गर्भ से निकले अवशेषों को बराबरी से हर एक कुंड मे दल दिया और दो साल बाद उन्हे खोलने का आदेश दिया। उन सौ कुंड मे 99 पुत्र और एक पुत्री का जन्म हुआ।

3. दोस्तों आपने सुना होगा महाभारत और रामायण मे दिव्य अस्त्र और ब्रम्‍हास्त्र की बात की जाती है, वो दर असल परमाणु बम ही थे। मोहनजोदड़ो की खुदाई मे जो कंकाल मिले हैं उनमे रेडीयेशन का असर पाया गया है जो किसी परमाणु विस्फोट के बाद पाया जाता है।

4. महाभारत विश्‍व का पहला विश्व्युद्ध था, इस युद्ध मे दुनिया भर से विदेशियों ने भी हिस्सा लिया था, ये एक रिसर्च के बाद कहा गया है।

5. क्या आप जानते हैं महाभारत युद्ध के नियमों के बारे मे? नियम थे की प्रतिदिन युद्ध सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक चलेगा, युद्ध के बाद सब मित्रता पूर्वक व्यवहार करेंगे। रथी-रथी से हाथी वेल हाथी वालों से और पैदल सेना पैदल सेना से युद्ध करेगी। एक वीर एक समय मे सिर्फ़ एक वीर के साथ युद्ध करेगा। भयभीत या शरण मे आए योद्धा पर कोई प्रहार नही करेगा। निहत्ते योद्धा पर कोई प्रहार नही करेगा। युद्ध मे सेवक की तरह काम करने वालों पर कोई प्रहार नही करेगा।

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